फिल्मकार संजय लीला भंसाली क्रिएटिविटी के नाम पर इतिहास के तथ्यों से छेड़छाड़ कर कंट्रोवर्सी क्रिएट कर कमाई के लिए जाने जाते हैं। तड़क-भड़क और भव्य फिल्मी सेटों की आड़ में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करते रहे हैं। भंसाली फैक्ट के साथ फेर-बदल सिर्फ हिंदूओं के खिलाफ फिल्म बनाने में करते हैं। जयपुर में पद्मावती फिल्म की शूटिंग के दौरान करणी सेना के लोगों ने इनका जमकर विरोध किया और साफ कहा कि अब इतिहास के तथ्यों से तोड़-मरोड़ सहन नहीं होगा।

संजय लीला भंसाली पर आरोप है कि उन्होंने रानी पद्मावती को अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका बताने के लिए कई इतिहास से जुड़े तथ्यों में कई बदलाव किए हैं। चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मावती राजा रतनसिंह की पत्नी थीं। पद्मावती को पद्मिनी नाम से भी जाना जाता था। वो बेहद खूबसूरत थी। कहा जाता है कि उनकी खूबसूरती से प्रभावित खिलजी वंश का शासक अलाउद्दीन खिलजी पद्मावती को पाना चाहता था। पद्मावती को पाने के लिए अलाउद्दीन ने चित्तौड़गढ़ पर हमला कर दिया। आखिर में अपनी इज्जत बचाने के लिए सैकड़ों राजपूत महिलाओं के साथ रानी पद्मावती को जौहर (आत्मदाह) करना पड़ा।

बताया जाता है कि राजपूत समाज ने इस बारे में संजय लीला भंसाली को कई पत्र भी लिखे। उनसे इतिहास को सही तरीके से पेश करने को कहा गया, लेकिन वे नहीं माने। उनसे कहा गया कि राजपूत समाज के पास बहुत समृद्ध लाइब्रेरी है। इतिहास की किसी भी किताब में पद्मावती को अलाउद्दीन की प्रेमिका नहीं बताया गया है। समाज के लोगो का कहना है कि ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ कर पद्मावती को बदनाम किया जा रहा है।

राजपूत करणी सेना के लोकेंद्र सिंह कालवी का कहना है कि जिस रानी ने देश और कुल की मर्यादा के लिए 16 हजार रानियों के साथ जौहर कर लिया था, उसे इस फिल्म में खिलजी की प्रेमिका के रूप में दिखाना बेहद आपत्तिजनक है। यह हमारी संस्कृति पर तमाचा है।

करणी सेना का दावा है कि भंसाली ने फिल्म पद्मावती में अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती के बीच एक बेहद आपत्तिजनक सीन डाला है। इस सीन में अलाउद्दीन खिलजी एक सपना देखता है जिसमें वो रानी पद्मावती के साथ है। करणी सेना का दावा है कि वास्तव में खिलजी और पद्मावती ने कभी एक दूसरे को आमने-सामने देखा तक नहीं और इतिहास की किसी किताब में भी इस तरह के किसी सपने का कोई जिक्र नहीं है।

करणी सेना से जुड़े लोगों का कहना है कि अलाउद्दीन खिलजी एक मुस्लिम हमलावर था और हिंदू रानी पद्मावती को दास बनाना चाहता था। भंसाली इसे लव स्टोरी में बदल रचनात्मकता का नाम दे रहे हैं। भंसाली इसके बाद सोशल मीडिया पर निशाने पर आ गए।

 

 

-हितेंद्र गुप्ता