एक सर्वेक्षण से पता चला है कि 78 प्रतिशत भारतीय दोपहिया सवार 50 प्रतिशत सड़क संकेतों को भी नहीं पहचान है।

भारतीय दोपहिया सवारों के दिमाग में सड़क सुरक्षा उपायों को बिठाने के लिए अपने प्रयासों को जारी रखते हुए होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्रा लि (एचएमएसआई) ने भारत के दोपहिया सवारों में सड़क सुरक्षा संकेतों के प्रति जागरूकता का स्तर जानने और उनके बर्ताव को समझने के उद्देश्य से एक विशाल राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण ‘होंडा रोड साइन आईक्यू सर्वे’ किया।

होंडा के ‘होंडा रोड साइन आईक्यू सर्वे का उद्घाटन राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान 10 प्रमुख भारतीय शहरों में लगभग 1,500 दोपहिया वाहन सवारों की भागीदारी के साथ किया गया।

‘होंडा दोपहिया रोड साइन आईक्यू सर्वेक्षण’ के अनुसारः

*भारत विश्व का सबसे बड़ा दोपहिया वाहन बाजार है… लेकिन देश में सड़क संकेतों के प्रति साझरता अभी भी कम है!

*होंडा रोड साइन आईक्यू सर्वे के अनुसार, 78 प्रतिशत भारतीय दोपहिया सवार 50 प्रतिशत सड़क संकेतों को भी नहीं पहचान सकते!

*शहरों के बीच मुंबई सबसे अधिक जागरूक शहर रहा जहां के 79 प्रतिशत दोपहिया सवारों ने आधे सड़क सुरक्षा संकेतों को बिल्कुल सही पहचाने में सफल हुए, इसके बाद पुणे (63 प्रतिशत) और बेंगलूरु (41 प्रतिशत) का स्थान रहा।

*सर्वेक्षण से एक बार फिर पुष्टि हुई है कि सड़क सुरक्षा के 3ई (एनफोर्समेंट, इंजीनियरिंग और एजुकेशन) में बेहतर शिक्षा की आवश्यकता है क्योंकि करीब 80 प्रतिशत भारतीय दोपहिया सवार अभी भी सचेत करने वाले सड़क संकेतों और अनिवार्य सड़क संकेतों में अंतर से अनभिज्ञ हैं।

*चूंकि अधिक से अधिक महिलाएं अब सशक्त सवार बन रही हैं, इसलिए भारतीय पुरुषों के मुकाबले भारतीय महिलाएं कहीं अधिक सड़क संकेतों को जानती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर सर्वेक्षण में शामिल 26 प्रतिशत महिलाओं ने आधे सड़क संकेतों को पहचाना, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा 21 प्रतिशत (पुरुषों के बहुसंख्य सवार होने के बावजूद) रहा।

*विभिन्न आयु वर्ग के बीच, 20 से 24 वर्ष के युवा राष्ट्रीय सड़क संकेतों के प्रति सबसे अधिक (31 प्रतिशत) जागरूक हैं जबकि 25 से 44 आयु वर्ग के महज 18 प्रतिशत प्रतिभागी ही आधे सड़क संकेतों को पहचाने में सफल रहे। दिलचस्प है कि 45 वर्ष से अधिक आयु के 30 प्रतिशत प्रतिभागी आधे सड़क संकेतों को पहचान सकते थे।

*अच्छी खबर यह है कि सुरक्षा अब भारतीय लोगों के दिमाग में है, लेकिन हम अपनी आदतों के कारण अभी भी दुर्घटनाओं को आमंत्रित करते हैं।

*भारतीय सवार खुद की सुरक्षा को महत्व देते हैं! सर्वेक्षण में शामिल 63 प्रतिशत यानी अधिकांश सवारों ने कहा कि वे खुद की सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनते हैं। जबकि राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा प्रवर्तन (16 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे जुर्माने से बचने के लिए हेलमेट पहनते हैं) और पारिवारिक दबाव (16 प्रतिशत अन्य लोगों ने कहा कि वे पारिवारिक दबाव के कारण हेलमेट पहनते हैं) भारतीय सवारों को हेलमेट पहनने के लिए दो सबसे बड़े प्रेरक हैं।

*अधिकतर भारतीय सवार हेलमेट के महत्व को समझते हैं लेकिन तभी जब वे खुद दोपहिया वाहन की सवारी करते हैं। 55 प्रतिशत सवार पीछे बैठने पर हेलमेट नहीं पहनते हैं और इस प्रकार अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

*सर्वेक्षण में शामिल 51 प्रतिशत सवारों ने कहा कि 2016 में उन्होंने न तो जुर्माना भरा और न ही लाल बत्ती को पार किया। लेकिन जोखिमपूर्ण सवारी अभी भी जारी है क्योंकि 30 प्रतिशत सवारों ने कहा कि वे सप्ताह में 1-2 बार लाल बत्ती पार कर जाते हैं।

सर्वेक्षण के खुलासों और सड़क सुरक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में होंडा के प्रयासों के बारे में बताते हुए होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया प्रा लि के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (बिक्री एवं विपणन) यादविंदर सिंह गुलेरिया ने कहा, ”देश में सड़क दुर्घटनाओं के कारण सबसे अधिक मृत्यु (31.5 प्रतिशत) दोपहिया वाहनों के मामले में होती है। भारतीय सड़कों पर प्रत्येक दो सेकेंड में एक नया दोपहिया वाहन उतर रहा है और ऐसे में -हरेक के लिए सुरक्षा – एक जिम्मेदार कंपनी के रूप में होंडा की प्राथमिकता है। होंडा रोड साइन आईक्यू सर्वे से एक बार फिर साबित होता है कि सड़क सुरक्षा शिक्षा के माध्यम से भारतीय मानसिकता में व्यवहार संबंधी बदलाव में निवेश करने की बेहद आवश्यकता है। हम देशभर में होंडा के 11 यातायात पार्कों में भारत कें सड़क सुरक्षा पर 10 लाख से अधिक लोगों को पहले ही शिक्षित कर चुके हैं। इनमें 38 प्रतिशत बच्चे हैं क्योंकि होंडा का उद्देश्य आज के युवाओं को कल के जिम्मेदार सड़क उपयोगकर्ता बनाना है। इस सर्वेक्षण के बाद होंडा बच्चों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए और महिलाओं को सशक्त बनाते हुए अपनी सड़क सुरक्षा गतिविधियों में और तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

होंडा का राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह अभियानः
सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए होंडा देशभर के 250 शहरों में 24,000 से अधिक बच्चों और परिवारों के साथ संबद्ध है। इस आयोजन में समाज के विभिन्न हितधारकों जैसे रक्षाकर्मियों, कंपनियों, स्कूलों, कई राज्य के पुलिस विभाग और गैर सरकारी संगठनों ने होंडा का समर्थन किया है।

-ललिता गुप्ता