मोदी सूत्र अवचेतन मन को खोलता है। यह सोच में विस्तार लाता है। लोगों के नजरिए में बदलाव लाता है। यह कहना था वरिष्ठ पत्रकार और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रमुख पद्मश्री राम बहादुर राय जी का। जेएनयू में हरीश बर्णवाल की पुस्तक मोदी सूत्र के विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी पुस्तक है जिसे रोज पढ़ने और गुनने की जरूरत है। इसे अगर आप सकारात्मकता से देखेगें तो ये आपका जीवन भर साथ निभाएगा।

पत्रकार और लेखक हरीश बर्णवाल ने कहा कि जिस जेएनयू में ठीक साल भर पहले राष्ट्रविरोधी नारे लगे थे, उसी विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी से जुड़ी किताब पर परिचर्चा हुई। इस किताब में जीवन से जुड़ी बातें है। इसे रोज पढ़कर जीवन में उतार सकते हैं।

जेएनयू में पुस्तक विमोचन और परिचर्चा कार्यक्रम को आईआईएमसी के महानिदेशक केजी सुरेश, सांसद आरके सिन्हा, जेएनयू के प्रोफेसर अश्विनी महापात्र और आजतक के सीनियर एंकर सईद अंसारी ने भी संबोधित किया।

मोदी सूत्र का विमोचन सोशल मीडिया पर भी छाया रहा। ट्विटर पर भी मोदी सूत्र दिनभर टॉप ट्रेंड करता रहा और पहले स्थान पर भी रहा।

इस पुस्तक में जीवन से जुड़े कई सूत्र हैं, जिसे प्रत्येक व्यक्ति को पढ़ना, समझना और उसे दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। यह सूत्र हमें विवाद से संवाद की ओर लेकर चलता है। राजनीति से राष्ट्रनीति की ओर चलने का रास्ता बताता है।

मोदी सूत्र को ब्लूम्सबरी पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया। यह वही पब्लिकेशन है, जिन्होंने हैरी पॉटर की कहानियों को पुस्तक का रूप दिया है। इस पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन से जुड़ी हुई कई अप्रकाशित तस्वीरों का संकलन 16 पेजों है।

इस पुस्तक में नरेंद्र मोदी के 283 सूत्र प्रकाशित हैं। इन सूत्रों को विषयवार दस अलग-अलग अध्यायों में बांटा गया है। एक ओर जहां परीक्षा देने वाले छात्रों की बात हो रही है, तो वहीं वैज्ञानिकों से लेकर जवानों की भी बात हो रही है। पर्यावरण से लेकर सेहत तो व्यक्ति विकास से लेकर मानवता के विकास को लेकर सूत्र गढ़े हैं। सभी सूत्रों को समय-समय पर नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषणों से तैयार किया गया है। ये सूत्र मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनने के सफर का साक्षी है।

पुस्तक में प्रकाशित सभी सूत्र एक से एक हैं। अपने आप में एक-एक सूत्र जीवन में क्रांति लाने और महान कारक बनने के लिए पर्याप्त है। इन सूत्रों को अगर किसी ने अपने जीवन में उतार लिया, उसे अपने व्यवहार में शामिल कर लिया तो तय है उसके जीवन में क्रांतिकारी बदलाव होंगे। इन सूत्रों को जीवन में अमल करते ही परिवर्तन की झनझनाहट को आप महसूस करने लगेंगे।

परिचर्चा में आकाश सोनी, सुमित अवस्थी, चंदा बंद सत्याग्रह चलाने वाले मुनीश रायजादा, सौरभ शर्मा, प्रज्ञा भूषण, रवि भदौरिया, रौशन पाठक, रितेश माहेश्वरी और नागेंद्र नीरज जैस कई सम्मानित लोग भी शामिल हुए।

-हितेंद्र गुप्ता