श्री रामजन्म भूमि अयोध्या पर राजा जय सिंह का ऐतिहासिक अधिकार होने के कारण इस पर निरर्थक विवाद समाप्त हो। ऐसा कहना है प्रो दीनबंधु पांडेय का। प्रो दीनबंधु पांडेय ने अपनी पुस्तक “राम-जन्मभूमि मन्दिर अयोध्या की प्राचीनता” के लोकार्पण के अवसर पर कहा कि अयोध्या स्थित जन्म-स्थान पर श्री राम मंदिर का निर्माण होना चाहिये। ऐतिहासिक साक्ष्यों के उजाले में राममंदिर विवाद का पटाक्षेप आज से बहुत पहले सन् 1717 में तब हो गया था, जब जयपुर के सवाई राजा जय सिंह ने मुगल शासक फ़र्रुखशियर से भगवान राम के जन्म-स्थान के रूप में मान्य भूमि का स्वामित्व प्राप्त कर लिया था, अतः इस निरर्थक विवाद का अंत होना चाहिए।

नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में केन्द्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि इतिहास लेखन की पश्चिमी दृष्टि से भारत के इतिहास का सही मूल्यांकन नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि श्री राम की जन जन में व्याप्त हैं।

इस अवसर पर भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने विश्व के अनेक देशों की संस्कृतियों में व्याप्त राम की गाथाओं एवं मान्यताओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने रामायण में विभिन्न स्थलों पर उद्धृत वैज्ञानिक तथ्यों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि आज के भारत में भी सामाजिक आदर्श श्री राम के जीवन चरित्र पर आधारित हैं। उन्होंने श्री राम जन्मभूमि विवाद पर न्यायालय को त्वरित गति से निर्णय करने पर भी बल दिया।

भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के चेयरमैन एवं इतिहासविद प्रो अरविंद जामखेडकर ने इतिहास लेखन की भारतीय परंपरा की समृद्धता को रेखांकित किया और दोनों ही ग्रंथों रामायण एवं महाभारत सहित लोकजीवन की स्मृतियों में व्याप्त अलिखित इतिहास के महत्व का प्रतिपादन किया। उनके अनुसार जन-जीवन की स्मृतियां साम्राज्यों के नष्ट होने पर भी नष्ट नहीं होती हैं।

कार्यक्रम में इंडोलाजी फाउंडेशन के ललित मिश्र, अनूप शर्मा, डॉ अरुण प्रकाश पांडेय के साथ बीएचयू, जेएनयू, एमिटी सहित कई विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद भी उपस्थित थे।